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सारण : माँझी प्रखण्ड के घोरहट मिडिल स्कूल के नियोजित शिक्षक परशुराम यादव की हार्ट अटैक से हुई मौत

सारण : माँझी प्रखण्ड के घोरहट मिडिल स्कूल के नियोजित शिक्षक परशुराम यादव की हार्ट अटैक से हुई मौत

सत्याग्रह न्यूज माँझी संवददाता रोहित राज

माँझी (10 अक्टूबर 2017) प्रखण्ड के घोरहट मठिया निवासी व घोरहट मिडिल स्कूल के नियोजित शिक्षक 48 वर्षीय परशुराम यादव की बीती रात हार्ट अटैक के कारण मौत हो गई।
मृतक बेहद गरीब परिवार से आता था तथा पिछले ग्यारह वर्षों से विभागीय अनियमितता के कारण उसका वेतन भुगतान नहीं किया जा सका था।शिक्षक की मौत की खबर पाकर शिक्षक नेता व ग्रामीण आक्रोशीत थे । मौत के 12 घंटे बाद डी ई ओ राज कुमार सिंह के मृतक के घर पहुंचने के बाद शव उठाया जा सका।श्री सिंह ने मृतक की तमाम बकाया राशि का शीघ्र भुगतान करने मृतक के आश्रित को अनुकम्पा के आधार पर रोजगार मुहैया कराने तथा मानदेय भुगतान में अनावश्यक रोड़ा अटकाने वाले क्लर्क अनिल मिश्रा समेत अन्य पर करवाई का आश्वासन दिया।
इससे पहले मौत की खबर मिलने के बाद पहुंचे पूर्व प्रत्याशी व युवा नेता राणा प्रताप उर्फ़ डब्लू सिंह जदयू नेता निरंजन सिंह गुड्डू सिंह शिक्षक नेता समरेंद्र बहादुर सिंह राजकुमार सिंह उमेश यादव कुलदीप सिंह आदि ने घटना के लिए जिम्मेवार स्थापना डी पी ओ दिलीप सिंह तत्कालीन बी इ ओ समेत अन्य पदाधिकारियों को दोषी ठहराते हुए उनपर हत्या का मुकदमा चलाने की मांग कर रहे थे। घटना स्थल पर पहुंचे बी डी ओ मिथिलेश बिहारी वर्मा तथा थानाध्यक्ष अनुज कुमार पाण्डेय द्वारा समझाने का प्रयास बेअसर रहा।
वर्ष 2006 में तत्कालीन मुखिया फुलपति देवी ने मृतक परशुराम यादव समेत कुल दस पंचायत शिक्षकों को चयनित कर योगदान कराया था।तथा पूर्व मंत्री प्रो रविंद्र नाथ मिश्रा के अनुज व वर्तमान मुखिया पति नरेंद्र मिश्रा ने नियोजन को अबैध बताते हुए हाईकोर्ट में मामले को चुनौती दी थी।बावजूद इसके वर्ष 2014 नवम्बर में हाई कोर्ट के आदेश पर प्राधिकार ने सभी दस शिक्षकों को बैध करार देते हुए मानदेय भूगतान कर दिया।लेकिन दुर्भाग्य की बात यह हुई की बाकि शिक्षकों ने अपना मानदेय प्राप्त कर लिया।लेकिन मृतक ने अपने खाते में पहले से जमा 80 हजार के साथ इसे भी बेटी के विवाह के लिए उसी खाते पर छोड़ दिया।तभी शिकायत कर्ता के दुबारा आवेदन पर पदाधिकारियों ने उक्त खाते पर रोक लगा दी और विभागीय निर्देश के आलोक में ड्यूटी पर तैनात रहा।
खाते पर रोक लगने के साथ ही एकलौते पुत्र ने भी घर छोड़ दिया और अबतक नहीं लौटा।दो वर्ष पूर्व उक्त अवधि में इष्ट मित्रों के सहयोग से दो पुत्रियों की शादी हो सकी।एक वर्ष पूर्व हुए मृतक के पिता सुग्रीव यादव की मौत का सारा खर्च भी गांव व सगे संबंधियों ने वहन किया।स्वाभिमानी होने की वजह से कभी किसी से अपनी परेशानी नहीं जताते थे।गांव के लोग उसे अनाज व कपडा आदि उपलब्ध कराते थे।भूमिहीन शिक्षक झोंपड़ीनुमा अपने घर में अनाज उपलब्ध नहीं रहने पर दरवाजे पर लगाये गए लौका नेनुआ ही नहीं बल्कि घास व पता उबाल कर अपना पेट भर लेते थे।गांव के लोग उसकी दयनीय हालत तथा विभाग की प्रताड़ना को लेकर क्षुब्ध थे ।

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